भोजन केवल हमारी भूख मिटाने का साधन नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई लोगों की मेहनत, प्राकृतिक संसाधन और समय जुड़ा होता है। ऐसे में थाली में लिया गया हर निवाला और बचा हुआ हर कौर महत्वपूर्ण है। इसी सोच को सामने रखते हुए केएलएच अजीजनगर परिसर की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाइयों ने विश्व खाद्य दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने हिस्सा लिया। इस दौरान भोजन के संरक्षण, खाने की बर्बादी रोकने और जरूरत के अनुसार भोजन लेने जैसे विषयों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को यह समझाना था कि भोजन का सम्मान केवल उसे खाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उतना ही जरूरी है कि भोजन बेवजह बर्बाद न हो, Best Universities in India।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि और पोषण विशेषज्ञ गायत्री नेमलिकांति ने संतुलित आहार के महत्व पर अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि स्वस्थ जीवन के लिए शरीर की जरूरत के अनुसार सही और पौष्टिक भोजन लेना जरूरी है। साथ ही भोजन के प्रति जिम्मेदार व्यवहार भी हमारी दिनचर्या का हिस्सा होना चाहिए।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्वस्थ पीढ़ी तैयार करने के लिए बच्चों और युवाओं में सही खान-पान की आदत विकसित करना जरूरी है। भोजन की गुणवत्ता, मात्रा और पोषण को समझकर लिए गए फैसले लंबे समय में बेहतर स्वास्थ्य की नींव रख सकते हैं।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को भोजन से जुड़े छोटे लेकिन प्रभावी बदलावों के लिए प्रेरित किया गया। जरूरत से अधिक भोजन थाली में न लेना, बचा हुआ खाना कम करना और भोजन का चुनाव सोच-समझकर करना ऐसी आदतें हैं, जिन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में आसानी से अपनाया जा सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, भोजन की बर्बादी केवल खाने की बर्बादी नहीं है। एक थाली तक भोजन पहुंचाने में किसान से लेकर परिवहन और रसोई तक कई स्तरों पर मेहनत और संसाधनों का इस्तेमाल होता है। इसलिए भोजन को बिना वजह फेंकना इन सभी संसाधनों की अनदेखी भी है।

विश्व खाद्य दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने व्यक्तिगत स्वास्थ्य और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संबंध को भी सामने रखा। छात्रों को यह संदेश दिया गया कि जिम्मेदार भोजन की शुरुआत व्यक्ति की अपनी थाली से हो सकती है। यदि हर व्यक्ति अपनी जरूरत के अनुसार भोजन ले और अनावश्यक बर्बादी से बचे, तो इसका सकारात्मक असर समाज पर भी पड़ सकता है।

KLU परिसर में आयोजित यह पहल विद्यार्थियों को जागरूक करने के साथ-साथ उन्हें व्यवहारिक बदलाव के लिए प्रेरित करने का प्रयास रही। छोटी-छोटी आदतों को लगातार अपनाकर भोजन की बर्बादी कम की जा सकती है और संसाधनों के प्रति जिम्मेदारी की भावना मजबूत की जा सकती है।

विश्व खाद्य दिवस का यह संदेश साफ रहा कि हर थाली मायने रखती है और भोजन का हर निवाला सम्मान का हकदार है।