सपनों को पूरा करने के लिए बड़े शहर या मजबूत आर्थिक स्थिति ही जरूरी नहीं होती। अगर मेहनत, हिम्मत और आगे बढ़ने का जुनून हो, तो छोटे गांव से निकला व्यक्ति भी बड़ी पहचान बना सकता है। इसका उदाहरण हैं KL University, कोंडापुर की MBA छात्रा और धावक मारीपल्ली उमा।

तेलंगाना के सूर्यापेट जिले के लिंगापल्ली गांव से आने वाली उमा ने आर्थिक परेशानियों के बीच अपनी पढ़ाई और खेल दोनों को जारी रखा। उनके माता-पिता वीरैया और रेणुका कृषि मजदूर हैं। परिवार की सीमित आर्थिक स्थिति के बावजूद उमा ने अपने सपनों को पीछे नहीं छोड़ा और लगातार मेहनत करती रहीं, Best Universities in India।

उमा ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जेडपीएचएस, न्यूटनकल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने नलगोंडा से इंटरमीडिएट और स्नातक की पढ़ाई पूरी की। वर्तमान में वह केएलएच ग्लोबल बिजनेस स्कूल में एमबीए कर रही हैं। पढ़ाई के साथ-साथ वह लगातार एथलेटिक्स की तैयारी भी कर रही हैं।

2020 में शुरू हुआ दौड़ का सफर

उमा ने वर्ष 2020 में एथलेटिक्स की शुरुआत की। शुरुआत के बाद उन्होंने धीरे-धीरे लंबी दूरी की दौड़ में अपनी पहचान बनानी शुरू की। उन्होंने हाफ मैराथन और फुल मैराथन जैसी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया।

लगातार अभ्यास और मेहनत के कारण उमा ने राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक हासिल किया। इसके अलावा उन्होंने 50 किलोमीटर विश्व चैंपियनशिप में 14वां स्थान प्राप्त किया। यह उपलब्धि उनके खेल जीवन में एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा सकती है।

उमा को प्रशिक्षण देने में डॉ. जी. वी. सुब्बा राव की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। वह भारतीय खेल प्राधिकरण से जुड़े वरिष्ठ प्रशिक्षक हैं। उनके मार्गदर्शन में उमा अपनी दौड़ की क्षमता, सहनशक्ति और प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए लगातार अभ्यास कर रही हैं।

पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन

एक खिलाड़ी के लिए रोजाना कई घंटे अभ्यास करना आसान नहीं होता। वहीं, एमबीए जैसी पढ़ाई के लिए भी समय और मेहनत की जरूरत होती है। उमा इन दोनों जिम्मेदारियों को साथ लेकर आगे बढ़ रही हैं।

उनका लक्ष्य केवल खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना नहीं है, बल्कि आने वाले समय में लंबी दूरी की दौड़ में और बेहतर प्रदर्शन करना है। इसके साथ ही वह अपनी शिक्षा पूरी कर अपने करियर को भी मजबूत बनाना चाहती हैं।

शिक्षा के साथ मिला बड़ा सहयोग

उमा की प्रतिभा, मेहनत और खेल के प्रति समर्पण को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रबंधन ने उनकी उच्च शिक्षा के लिए 100 प्रतिशत फीस में छूट दी है। इस सहयोग से उमा को अपनी पढ़ाई जारी रखने के साथ खेल पर भी ध्यान देने का अवसर मिला है।

केएलएच ग्लोबल बिजनेस स्कूल का मानना है कि प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के लिए सही अवसर और सहयोग मिलना जरूरी है। उमा की कहानी इसी सोच को सामने रखती है।

ग्रामीण परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता तक पहुंचना उमा के लिए आसान सफर नहीं रहा। आर्थिक चुनौतियों, पढ़ाई और कठिन प्रशिक्षण के बीच उन्होंने अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखा। उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित साधनों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं।

उमा की यात्रा अभी जारी है। एक ओर वह MBA की पढ़ाई कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर दौड़ की दुनिया में नए लक्ष्य तय कर रही हैं। उनकी मेहनत और लगन यह दिखाती है कि लगातार प्रयास करने वाला व्यक्ति अपनी परिस्थितियों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ सकता है।